सुबह जो पुलिस ये बोल रही थी कि पप्पू यादव को
सरकारी कार्य में बाधा और लॉकडाउन के उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया है
वही पुलिस शाम होते होते ये बोलने लगी कि उनको अपहरण के मामले में गिरफ्तार किया गया
है | वही पप्पू का कहना है कि ये सब एम्बुलेंस माफिया का पर्दाफाश करने का इनाम है
| पटना के डीएसपी ने सुबह बताया कि पप्पू यादव को लॉकडाउन के नियमों का पालन न
करने के लिए गिरफ्तार किया गया है लेकिन शाम होते होते मधेपुरा की पुलिस पप्पू
यादव को गिरफ्तार करने पटना के गाँधी मैदान थाने पहुच जाती है |
पप्पू यादव ने इस मामले में ट्वीट करते हुए कहा
कि- “मुझे मधेपुरा के 32 साल पुराने मुकदमे में जेल
भेजा जा रहा है। पूरे दिन लॉकडाउन के उल्लंघन के आरोप में बैठाकर रखा। फिर ढूंढकर
मामला निकाला गया। बीजेपी के दबाव में CM @NitishKumar जी इतने कमजोर पड़ जाएंगे यह अंदाजा नहीं था। आग्रह है कि
कोविड मरीजों के उपचार में कोई कमी न रहने दें।“
अपहरण का जो मामला पुलिस बता रही
है वो सन 1989 का बताया जा रहा है | आरोप है कि पप्पू यादव ने अपने कुछ साथियों के
साथ मिलकर मधेपुरा के मुरलीगंज थाने के अंतर्गत आने वाले मिडिल चौक से राजकुमार
यादव और उमा यादव का अपहरण किया था | इसकी शिकायत शैलेन्द्र यादव ने कि थी | इसके
3 मार बाद पप्पू यादव को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया था लेकिन कुछ माह बाद बेल
मिलने पर वो बाहर आ जाते हैं और राजनीति में सक्रिय हो जाते हैं | उसके बाद वो
विधायक और एमपी बने |
इस मामले में बेल पर बहार आने के
बाद पप्पू यादव कभी कोर्ट में नहीं उपस्थित हुए | इस कारण मधेपुरा में एसीजेएम प्रथम
के स्पेशल कोर्ट ने 10 फ़रवरी 2020 को पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जरी
किया गया | लेकिन उस पर पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की | न्यायलय द्वारा कारण
पूछने पर पुलिस ने बताया कि चौकीदार से वारंट खो गया है फिर पुलिस में 17 सितम्बर 2020
को वारंट की दूसरी प्रति के लिए आवेदन किया | वारंट की दूसरी कॉपी मिलने के बाद भी
पुलिस ने इस पर कोई कार्यवाही नहीं की | फिर मधेपुरा पुलिस ने उनको फरार घोषित कर
दिया जबकि पप्पू यादव बिहार में ही रह रहे थे | तत्पश्चात पुलिस ने न्यायलय से
धारा 83 के तहत उनके घर की कुर्की का वारंट माँगा | 22 मार्च को न्यायलय ने यह
वारंट भी जारी कर दिया था लेकिन पुलिस तब से लेकर अभी तक शांत बैठी रही | लेकिन अचानक
पप्पू यादव को अत्यंत ही नाटकीय तरीके से गिरफ्तार कर लिया जाता है | पुलिस की यह
कार्यवाही भले ही कानून के मुताबिक हो लेकिन कार्यवाही के समय को देखते हुए यह
गिरफ़्तारी राजनीति से प्रेरित लगती है |
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