एक समय
था जब मोदी लहर अपने चरम पर थी | लोगों को लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों के
नाम तक नहीं पता थे लेकिन मोदी लहर में वो भी विजयी हुए | विजयी हो भी क्यों न,
लोग प्रत्याशी को नहीं बल्कि मोदी को वोट दे रहे थे |
लेकिन अब समय बदल चुका है, इसका ताजा उदहारण
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे हैं | जहाँ भारतीय जनता पार्टी को इतने प्रयासों के
बाद भी बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा | एक तरफ मोदी, अमित शाह, योगी
आदित्यनाथ जैसे स्टार प्रचारक थे तो दूसरी तरफ ममता अकेली, लेकिन फिर भी बीजेपी 100
सीटें नहीं हासिल कर सकी |
मोदी विरोधी लहर का दूसरा उदहारण उत्तर प्रदेश
के पंचायत चुनाव के नतीजों में देखने को मिलता है | जहाँ बीजेपी की सरकार होते हुए
भी बीजेपी की हालत बहुत अच्छी नहीं है | यहाँ बहुत से बीजेपी नेता अपने
रिश्तेदारों को जिला पंचायत के चुनाव में जीत नहीं दिला सके | बीजेपी ने मैनपुरी
से समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेन्द्र यादव कि बहन संध्या यादव को अपना समर्थन दिया
था, लेकिन वह भी अपनी सीट नहीं बचा सकीं | सपा ने बीजेपी के गढ़ में तो सेंध लगा लि
है लेकिन बीजेपी सपा के गढ़ में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई है | इटावा की बात
करें तो वहां के 24 वार्डों में से 20 सीटो पर सपा ने जीत दर्ज की है तो बीजेपी
महज 1 या 2 सीटें ही जीत पाई है |
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राष्ट्रवादी किसान क्रांति दल के नेता अमरेश
मिश्र के अनुसार बाराबंकी में जहाँ लगभग सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी का कब्ज़ा है
वहाँ पर भी 57 जिला पंचायत सीटो में से मात्र 7 सीटें ही अपने पाले में कर पाई है
| उनका कहना है कि किसान आन्दोलन जमीनी स्तर पर बीजेपी को अच्छा खासा नुकसान
पंहुचा रहा है |
बात आंकड़ों की करें तो उत्तर प्रदेश की 3052
जिला पंचायत सदस्य की सीटों में से सपा को सबसे ज्यादा सीटें मिली हैं इसमें 747
सीटें सपा को, 690 सीटें बीजेपी को, 381 सीटें बसपा को, 76 सीटें कांग्रेस को, 60
सीटें राष्ट्रीय लोक दल को मिली और अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को भी लगभग
2 दर्जन सीटों पर जीत मिली है | हालाँकि ज़्यादातर जीत निर्दलीय उम्मीदवारों ने
दर्ज की है | लेकिन बीजेपी का दावा है कि उन्होंने 981 सीटों पर जीत हासिल की है
क्योंकि जीते हुए तमाम निर्दलीय उम्मीदवार भी बीजेपी के हैं | आपको बता दें कि
बीजेपी ने कुछ दिन पहले इन उम्मीदवारों को टिकट देने से मना कर दिया था लेकिन अब,
जब ये निर्दलीय उम्मीदवार बीजेपी के अधिकृत उम्मीदवारों को हरा कर चुनाव जीत चुके
हैं, बीजेपी इन्हें अपना उम्मीदवार बता रही हैं | बीजेपी का कहना है कि वो भले ही
निर्दलीय जीते हो, पर उनकी विचारधारा एक ही है |
प्रयागराज, मथुरा, अयोध्या, वाराणसी जो
बीजेपी के गढ़ मने जाते हैं वहां पर बीजेपी के उम्मीदवारों कि हार, वर्तमान जिला पंचायत सदय का
बीजेपी से समर्थन लेने के बाद हर जाना, प्रदेश में
बीजेपी कि सरकार होते हुए भी पंचायत चुनाव में इतना अच्छा प्रदर्शन न कर पाना,
क्या यह सब ये दर्शाता है कि अब मोदी लहर मोदी विरोधी लहर में बदल चुकी है या ये
सरकार का इस महामारी को ठीक प्रकार से नियंत्रण न कर पाना और किसान आन्दोलन से
किसानों में भरा गुस्सा इस हार का कारण है | वजह जो भी, आगामी विधानसभा चुनाव के
लिहाज से बीजेपी के लिए ये अच्छे संकेत नहीं हैं |
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